काली मंदिर, नामकुम रांची स्वर्णरेखा नदी श्मशान घाट में अध्यात्मिक कार्यक्रम,
रांची, नामकुम के स्वर्णरेखा नदी के किनारे श्मशान घाट के पास काली मंदिर में अध्यात्म ज्ञान के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता पंडित मारुति नंदन मिश्रा जी ने भक्तों को बताया कि तकनीक ज्ञान के साथ अध्यात्म को जोड़ कर देखें, बहुत फायदा होगा। उन्होंने कहा कि मंत्र और विज्ञान दोनों साथ साथ चलते हैं। अध्यात्म के कई कारक है जिसमें एक विज्ञान भी है। श्रद्धा भक्ति योग साधना पूजा तपस्या अन्य कारक हैं।
पंडित मारुति नंदन जी ने यह भी कहा कि अध्यात्म की छोटी सी जानकारी भी बच्चों के दिमाग को तेज कर देती है। एकाग्रता लाती है और याद करने की क्षमता बढ़ा देती है।
माताओं बहनों को इस बात की जानकारी दी गई कि अपने बच्चों को केवल एक बार भी दिन में 10 मिनट तक ध्यान विधि जरूर कराएं। ऐसा करने से बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन होता है। उन्होंने बताया कि तपस्वी ऋषि-मुनी योगी संत विज्ञान के तकनीक का प्रयोग करते हैं, और जो विज्ञान गणित नहीं जानते हैं वे भक्ति मार्ग पर चलते हैं। भक्ति मार्ग पर चलने के लिए विज्ञान साइंस की जरूरत नहीं है, केवल श्रद्धा की जरूरत होती है। धीरे-धीरे श्रद्धा ही तपस्या का रूप ले लेती है।
पंडित मारुति नंदन जी ने यह भी कहा कि अध्यात्म की छोटी सी जानकारी भी बच्चों के दिमाग को तेज कर देती है। एकाग्रता लाती है और याद करने की क्षमता बढ़ा देती है।
माताओं बहनों को इस बात की जानकारी दी गई कि अपने बच्चों को केवल एक बार भी दिन में 10 मिनट तक ध्यान विधि जरूर कराएं। ऐसा करने से बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन होता है। उन्होंने बताया कि तपस्वी ऋषि-मुनी योगी संत विज्ञान के तकनीक का प्रयोग करते हैं, और जो विज्ञान गणित नहीं जानते हैं वे भक्ति मार्ग पर चलते हैं। भक्ति मार्ग पर चलने के लिए विज्ञान साइंस की जरूरत नहीं है, केवल श्रद्धा की जरूरत होती है। धीरे-धीरे श्रद्धा ही तपस्या का रूप ले लेती है।
In Ranchi Jharkhand at Namkum Swarna Rekha river devotee learned about spiritual growth and development in life.
Guru Pandit Maruti Nandan- Mishra Pandit stated that spiritual education and scientific knowledge played role in life.